वसुंधरा का पन्ना
Saturday, 14 September 2024
नभ में दीप्त मित्रवर जिनके,
उन जलद घनों को फिर क्या बोलें ।
धरती माँ की हरीतिमा संग,
नीड़ सुखद वितान के खोलें ।।
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